भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद की इस अनूठी पहल में युक्रेन, उजवेकिस्तान, श्रीलंका, ईजिप्ट (मिश्र), तजागिस्तान,ईरान, वियतनाम आदि देशों ने जीता हिंदी पुरस्कार
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नई दिल्ली, 28 अक्तूबर। भारत में पढ रहे विदेशी छात्रों द्वारा हिंदी की प्रतियोगिता में शीर्ष पुरस्कार जीतना सोमवार को दिल्ली में बीच बहस का केंद्र बनता दिखा। बता दें कि दिल्ली विश्वविद्यालय सहित अन्य संस्थानों में सत्तर से ज्यादा विदेशी छात्र पढ़ाई। कर रहे हैं। सोमवार को 30 देशों के छात्र एक स्वर में यहां आइसीसीआर प्रागंण में बोले “भारत हमारे दिल में बसता है।’ भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद की इस अनूठी पहल में युक्रेन, उजवेकिस्तान, श्रीलंका, ईजिप्ट (मिश्र), तजागिस्तान,ईरान, वियतनाम आदि देशों के ये भारत में पढ़ाई कर रहे छात्रों ने हिंदी को लेकर हुई इस प्रतियोगिता में इतिहास रच डला। बीते दिनों ‘मुझमें भारत बसता है’ नाम से एक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था, इसमें विदेशी छात्रों ने परचम लहराए। विदेशी छात्रों में हिंदी प्रेम को देखते हुए इनके हुनर सम्मान के लिए सोमवार को सात पद्मश्री विजेता विभूतियां दिल्ली में एक मंच पर आकर उन्हें सम्मानित किया। आइसीसीआर के इस हिंदी प्रतियोगिता में जनुदि वीररत्ने (श्रीलंका) ने प्रथम, सबरीना (उजबेकिस्तान) ने द्वितीय और वलेरिया (यूक्रेन) ने तीसरा पुरस्कार जीता। हिंदी को लेकर सम्मानित होने वालों में उजबेकिस्तान की खैतली और जलौला के अलावा ईरान की छात्रा आर्या सफारी सहित कई विदेशी नाम शामिल है।
सोमवार को भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आइसीसीआर) की अगुवाई में करीब 30 से ज्यादा विदेशी विद्यार्थी शामिल हुए। समारोह में सभी विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित हुआ। आइसीसीआर के उप महानिदेशक डाक्टर डाक्टर राजेश रंजन ने इस मौके पर कहा-‘इन विदेशी छात्रों साबित कर दिया है कि हिंदी को लेकर विश्व में भी आकर्षण है। हिंदी को लेकर इनकी दक्षता किसी नजरिए से भारतीय छात्रों से कम नहीं है।’ महानिदेशक नंदिनी सिंगला ने कहा कि ‘ हिंदी पखवाड़े के अंतरगर्त आयोजित इस प्रतियोगिता से यह बात साबित हो रही है कि हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, संवेदना और विविधता को दुनिया से जोड़ने वाला माध्यम है। विदेशी छात्रों की सक्रिय भागीदारी भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को और मजबूत करती है।’
यह आयोजन हिंदी की वैश्विक पहुंच और भारत की सांस्कृतिक कूटनीति का जीवंत उदाहरण बना, जहां दुनिया के विभिन्न देशों से आए विद्यार्थी एक मंच पर हिंदी के माध्यम से भारत से अपने जुड़ाव की कहानी साझा करते दिखाई दिए। विदेशी विद्यार्थियों ने कहा ‘भारत हमारे दिल में बसता है। हमने भारत को केवल एक देश के रूप में नहीं, बल्कि अपनी शिक्षा, संस्कृति, संगीत, योग, कला और मानवीय संबंधों के माध्यम से महसूस किया है।’ उन्होंने भारत के साथ अपने अनुभवों को हिंदी में अभिव्यक्त किया।
एक सवाल के जवाब में उप महानिदेशक डाक्टर राजेश रंजन ने कहा कि विदेशी विद्यार्थियों की ओर से हिंदी में अपने अनुभव साझा करना भारत और विश्व के बीच मजबूत होते सांस्कृतिक संबंधों का उदाहरण है। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति को करीब से समझने का अवसर देते हैं। समापन समारोह की विशेषता सात पद्मश्री सम्मानित विभूतियों की सहभागिता रही। कला, संस्कृति, संगीत, हिंदी, चिकित्सा सहित विभिन्न क्षेत्रों की इन प्रतिष्ठित विभूतियों ने विदेशी विद्यार्थियों के साथ संवाद किया और उन्हें अपने अनुभवों से प्रेरित किया।
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