राष्ट्रीय नागरिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्ण कुमार गौतम ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को सौंपा ज्ञापन
नई दिल्ली/देहरादून, 25 सितंबर। उत्तराखंड, पंजाब और उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को बायोमीट्रिक पहचान आधारित मतदान प्रणाली के माध्यम से कराने की मांग उठाई गई है। राष्ट्रीय नागरिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्ण कुमार गौतम ने इस संबंध में भारत की राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर चुनाव प्रक्रिया में बायोमीट्रिक तकनीक के इस्तेमाल की मांग की है।
पार्टी की ओर से कहा गया है कि आगामी विधानसभा चुनावों में ऐसी तकनीक अपनाई जानी चाहिए, जिससे मतदाता की पहचान अधिक सुरक्षित एवं विश्वसनीय तरीके से सुनिश्चित की जा सके। पार्टी ने निर्वाचन आयोग से चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता, स्वतंत्रता और निष्पक्षता के साथ-साथ मतदाताओं के विश्वास को और मजबूत करने की दिशा में नई तकनीकों पर विचार करने की अपील की है।
चुनाव प्रक्रिया में तकनीक के विस्तार की मांग
राष्ट्रीय नागरिक पार्टी के अध्यक्ष कृष्ण कुमार गौतम ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक गणराज्य है और निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी चुनावों को निर्धारित संवैधानिक एवं कानूनी प्रक्रिया के तहत स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने की है।
गौतम ने कहा कि भारत में मतदान की प्रक्रिया समय के साथ तकनीकी रूप से विकसित हुई है। बैलेट पेपर से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) तक का सफर इसी तकनीकी बदलाव का हिस्सा है। वर्तमान में EVM के साथ VVPAT प्रणाली का भी इस्तेमाल किया जाता है। निर्वाचन आयोग के अनुसार, VVPAT में मतदाता द्वारा चुने गए उम्मीदवार की जानकारी वाली पर्ची लगभग सात सेकंड तक दिखाई देती है, जिसके बाद वह सीलबंद बॉक्स में चली जाती है।
बायोमीट्रिक पहचान आधारित मतदान का प्रस्ताव
कृष्ण कुमार गौतम ने कहा कि आज देश में डिजिटल तकनीक, इंटरनेट कनेक्टिविटी और बायोमीट्रिक पहचान से जुड़ी तकनीकों का व्यापक इस्तेमाल हो रहा है। ऐसे में निर्वाचन प्रक्रिया में भी आधुनिक पहचान तकनीक के संभावित इस्तेमाल पर विचार किया जाना चाहिए।
पार्टी के प्रस्ताव के अनुसार बायोमीट्रिक मतदान प्रणाली में मतदाता की पहचान के लिए फिंगरप्रिंट, आईरिस स्कैन या चेहरे की पहचान जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। पार्टी का दावा है कि ऐसी प्रणाली से फर्जी या डुप्लीकेट पहचान के आधार पर मतदान जैसी संभावित अनियमितताओं को रोकने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, वर्तमान निर्वाचन प्रक्रिया में मतदाता की पहचान के लिए EPIC सहित कई निर्धारित पहचान दस्तावेज स्वीकार किए जाते हैं। निर्वाचन आयोग की मौजूदा जानकारी के अनुसार आधार कार्ड भी स्वीकार्य पहचान दस्तावेजों में शामिल है।
EVM और VVPAT पर भी रखी राय
गौतम ने कहा कि शुरुआती दौर में भारत में बैलेट पेपर के माध्यम से चुनाव कराए जाते थे, जिसके बाद EVM का इस्तेमाल शुरू हुआ। उनके अनुसार इलेक्ट्रॉनिक मतदान व्यवस्था से मतदान और मतगणना प्रक्रिया में कई तरह की व्यवस्थागत सुविधाएं मिली हैं।
उन्होंने EVM को लेकर समय-समय पर उठाए गए सवालों का भी उल्लेख किया और कहा कि VVPAT जैसी व्यवस्था के माध्यम से मतदान प्रक्रिया में अतिरिक्त सत्यापन व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है।
निर्वाचन आयोग के अनुसार EVM के साथ VVPAT का उद्देश्य मतदाता को अपने डाले गए वोट को सत्यापित करने का अवसर देना है। आयोग EVM और VVPAT की जांच, रैंडमाइजेशन तथा अन्य प्रक्रियाओं के लिए भी निर्धारित व्यवस्थाएं लागू करता है।
महिला, पुरुष और किन्नर मतदाताओं के अधिकारों पर भी जोर
राष्ट्रीय नागरिक पार्टी ने अपने ज्ञापन में महिला, पुरुष और किन्नर समुदाय के नागरिकों की चुनावी भागीदारी और उनके अधिकारों से जुड़े मुद्दे को भी उठाया है।
पार्टी का कहना है कि तकनीक आधारित मतदाता पहचान प्रणाली के माध्यम से मतदाता सूची और मतदान प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने में सहायता मिल सकती है तथा सभी पात्र नागरिकों की चुनावी भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया जा सकता है।
निर्वाचन आयोग से विचार करने की अपील
कृष्ण कुमार गौतम ने निर्वाचन आयोग से आगामी विधानसभा चुनावों के संदर्भ में बायोमीट्रिक पहचान आधारित मतदान प्रणाली की संभावनाओं पर विचार करने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के दौर में चुनाव प्रक्रिया में भी नई तकनीकों का परीक्षण और मूल्यांकन किया जाना चाहिए, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में नागरिकों का विश्वास मजबूत हो और चुनावों की पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता को लेकर बेहतर व्यवस्था विकसित की जा सके।
फिलहाल भारत की मौजूदा मतदान व्यवस्था में EVM और VVPAT का इस्तेमाल निर्वाचन आयोग की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाता है। बायोमीट्रिक पहचान आधारित मतदान प्रणाली को लेकर राष्ट्रीय नागरिक पार्टी की यह मांग एक प्रस्ताव के रूप में सामने आई है।



