उत्तराखंड में चल रहे एसआईआर प्रक्रिया के दौरान अफरातफरी का माहौल
देहरादून, 26 सितंबर। भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर इस्तीफे देने का विपक्षी पार्टी के दबाव के बीच उत्तराखंड में भी एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने से अफरातफरी का माहौल बन गया है। उत्तराखंड में चल रहे एसआईआर प्रक्रिया के दौरान अब मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से डीएसई एवं पीएसई (डेमोग्राफिक सिमिलर एंट्री एवं फोटोग्राफिक सिमिलर एंट्री) के जरिए मतदाताओं का मिलान शुरू हो गई है। वर्तमान समय में एसआईआर अभियान के दौरान दावे और आपत्तियों का निस्तारण किया जा रहा है, ताकि हर एक मतदाता को मतदान का अधिकार मिल सके। ऐसे में अब डीएसई एवं पीएसई के जरिए ऐसे मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जिन मतदाताओं का नाम उत्तराखंड सूची के साथ ही उत्तरप्रदेश की मतदाता सूची में भी शामिल है। भारत निर्वाचन आयोग से उत्तराखंड को डीएसई एवं पीएसई के लिए सॉफ्टवेयर मिलने के बाद उत्तराखंड मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से डीएसई एवं पीएसई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। राज्य के पांच जिलों देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, उधम सिंह नगर और पौड़ी में ऐसे मतदाताओं को चिन्हित किया जा रहा है, जिनका नाम उत्तर प्रदेश की सूची में शामिल है। इसके लिए मतदाताओं के नाम को उत्तर प्रदेश की वोटर लिस्ट से मिलाए जाएंगे। साथ ही इन सभी संबंधित मतदाताओं की जानकारी उत्तर प्रदेश के निर्वाचन अधिकारियों को भेजे जाने की तैयारी है।
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पांच जिलों के मतदाताओं का उत्तरप्रदेश सूची से हो रहा मिलान
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प्रदेश के पांच जिलों में चल रहे डीएसई एवं पीएसई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उत्तर प्रदेश के अधिकारियों को पत्र भेजकर मतदाता सूची में नाम और अन्य विवरणों का सत्यापन कराने को कहा जाएगा। सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उत्तराखंड की वोटर लिस्ट में सुधार की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। उत्तराखंड के पांच जिलों देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, उधम सिंह नगर और पौड़ी में बड़ी संख्या में ऐसे परिवार रहते हैं, जिनका मूल संबंध उत्तर प्रदेश के तमाम क्षेत्रों से रहा है। इसके लिए निर्वाचन आयोग की ओर से बूथ स्तर पर मतदाताओं का विवरण तैयार किया जा रहा है।
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उत्तराखंड और उत्तरप्रदेश की वोटर लिस्ट से होगा मिलान:
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यह अभियान बीएलओ ऐप के जरिए चलाया जा रहा है। इसके लिए उत्तराखंड के इन पांचों जिलों के सभी बीएलओ को बीएलओ ऐप पर वेरिफाई पीएसई एंट्री के नाम से लिंक उपलब्ध कराया गया है। बीएलओ की ओर से इस ऐप्लीकेशन को खोलते ही उनके पास ये जानकारी मिल जाएगी कि उनके बूथ में कितने ऐसे मतदाता हैं जिनका नाम उत्तराखंड की मतदाता सूची के साथ ही उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में भी हैं। इसके बाद बीएलओ संबंधित मतदाता के घर जाएंगे और उनको इस बात की जानकारी देंगे कि उनका नाम उत्तराखंड के साथ ही उत्तर प्रदेश के मतदाता सूची में भी है।
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मतदाता से पूछी जाएगी च्वाइस
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बीएलओ उस मतदाता से ये भी पूछेगा कि वो अपना नाम उत्तराखंड में रखना चाहते हैं या फिर उत्तर प्रदेश में रखना चाहते हैं। अगर मतदाता अपना नाम उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में रखना चाहता है तो फिर उस मतदाता से फार्म 7 भरवाया जाएगा ताकि उसका नाम उत्तराखंड की मतदाता सूची से हटाया जा सके, लेकिन अगर मतदाता उत्तराखंड की मतदाता सूची में ही अपना नाम रखना चाहता है, तो फिर संबंधित ईआरओ की ओर से यूपी के संबंधित ईआरओ को पत्र भेजा जाएगा, ताकि उनका नाम वहां की सूची से हटाया जा सके।
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बॉर्डर वाले जिलों में खास तौर पर अभियान
— उत्तराखंड के सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास ने कहा कि- भारत निर्वाचन आयोग ने कुछ दिन पहले ही डीएसई विद पीएसई अभियान चलाने की अनुमति दे दी है। इसके बाद उत्तराखंड में इस अभियान को शुरू कर दिया गया है। इस अभियान के लिए नाम, पिता का नाम, रिलेशन जेंडर उम्र और फोटो मिलन करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने एक मॉड्यूल जारी किया है। लिहाजा, ये अभियान उत्तराखंड के बॉर्डर वाले पांच जिलों देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, उधम सिंह नगर और पौड़ी में शुरू कर दिया गया है।
सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि ऐसे में जितने भी मतदाताओं की मैचिंग होगी उन पर कार्रवाई होगी. ये व्यवस्था बीएलओ ऐप पर ही उपलब्ध है।
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